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Mai Aur Lucy

 189.00  150.00

PRODUCT DETAILS

  • ISBN : 978-93-90548-86-6
  • Publisher : Book River (10 March 2021)
  • Language : Hindi
  • Dimensions : 12 x 2 x 21 cm
  • Country of Origin : India
  • Pages : 110

Vanaphool

 110.00

PRODUCT DETAILS

  • ISBN : 978-93-90548-45-3
  • Publisher : Book River (10 March 2021)
  • Language : Hindi
  • Dimensions : 12 x 2 x 21 cm
  • Country of Origin : India
  • Pages : 115

SENGVE ARLO AHARCHI ARCHIM VOL.II

 139.00

PRODUCT DETAILS

  • ISBN : 978-93-90548-77-4
  • Publisher : Book River (10 March 2021)
  • Language : English
  • Dimensions : 12 x 6 x 21 cm
  • Country of Origin : India
  • Pages : 125

VOICES A NATIONAL RESEARCH ANTHOLOGY ON NORTHEAST INDIAN ENGLISH POETRY

 540.00

PRODUCT DETAILS

  • ISBN : 978-81-948248-0-0
  • Publisher : Book River (10 March 2021)
  • Language : English
  • Dimensions : 12 x 6 x 21 cm
  • Country of Origin : India
  • Pages : 255

IT’S THE BEST TIME TO BE A GRAVEDIGGER

 110.00

The Covid Pandemic and Year 2020- has been a beginning of suffering, pain for most and reflection, recalibration, reset for many. The gravedigger- blank verses resonate with collective mourning and loss. Manav is more of a reader than a writer. He has been victim of bibliotherapy and enriched by authoring his previous works “Ruminant” and “Sum”

A Life Under Mask

 149.00

A life under mask, humare jeevan me aaye sabse bade badalav ki kitab hai. Is kitab me kisne apne poems to kisine apne shayari, letters or stories ke jariye apne lockdown ka haal samjhaya hai.
Duniya jahan ki baate vo sari apne dil se nikal ke ek chote se kagaj pe likh dete hai, ji hai humare writer’s kuch khaas hai jo apni bhawanao ko hakigat me uthar dete hai.
Is kitab ki kamiyabi is kitab ke bemisaal writers ke bina aadhuri hai. Is kitab ko humne do bhashao me likha hai English aur Hinglish. Chand Lavzon Ki Kahani (CLKK TEAM) dwara prastut aur Mr. Deepak raut or Mr. Himanshu Jha ke dwara compiled is kitab ko apka pyaar milega ye asha hai.

Ardhya Satya Tum

 199.00

संपादकीय
‘‘उसका हाथ
अपने हाथ में
लेते हुए
मैंने सोचा
दुनिया को
हाथ की तरह
गर्म और सुंदर
होना चाहिए।’’
(केदारनाथ सिंह)

Publisher : Madhurachar (9 Feb. 2021)
Language : English
Paperback : 152 pages
ISBN-13 : 978.81.946859.4.4

Sunti Jao Prem Samarpan (Hindi)

 140.00

PRODUCT DETAILS

  • ISBN : 978-81-949001-1-5
  • Publisher : Book River (10 Feburary 2021)
  • Language : Hindi
  • Dimensions : 12 x 2 x 21 cm
  • Country of Origin : India
  • Pages : 90

Aakhir Tum Ho Kaun ? (Ek Lamha)

 110.00

ज़िन्दगी कट जायेगी मेरी, तुम अगर साथ मेरा दे दो।
मंजिल मिल जायेगी मेरी, तुम अगर साथ मेरा दे दो।
हम तुम्हें नैनो के आईने में बसायेगें,
अपनी यादों को फिर ताज़ा कर दो।
ज़िन्दगी कट………………………

Prakriti Ke Vibhinn Swaroop

 89.00

कविताएं पढ़ने और लिखने का शौक बचपन से ही था,
परन्तु जैसे ही प्रकृति के स्वच्छन्द वातावरण में शरण मिली तो मेरी
रचनात्मक अभिव्यक्ति में निखार आया। प्रकृति के आँचल में ही मैंने
आन्तरिक द्वन्दो,ं कुंठाओ,ं वेदनाओं का े शन्ू य पाया और प्रकृति के आँचल
में ही मैंने ईश्वरीय सौन्दर्य और ईश्वरीय प्रेम की अनुभूति की।

Fir Devta aa Gaye (Hindi)

 120.00  110.00

मैंने रोशनी को भीख मांगते देखा है, तिमिर से

जिसके माथे की सिलवटें पढ़ सकता था कोई भी

निर्जनता में पथरीला रस्ता करता है इंतज़ार

एक उजड़े मुसाफ़िर का बरसों से

कि कोई तो आये, इतना बड़ा दिल लेकर

Uski Aakar Baaton Main (Hindi)

 190.00

नमस्कार, वर्ष 1990 के पूर्व से काव्यधाराएँ मुझे अपनी आरे आकर्षित करने लगी थीं। परन्तु उन कविताओं, गीतो ंमें मेरा अपना क्या था, मुझे समझ नहीं आता था। वर्ष 1990 मे ंजब मैं कक्षा 10वीं में अध्ययनरत था उन दिनो ंमंैन ेएक छन्दात्मक कविता जिसका शीर्षक ‘‘सपना‘‘ लिखी और उसी को मैं अपनी पहली रचना मानता हँू। जिसे मेर ेसहपाठी यारों ने खबू सुना व सराहा खास कर वर्तमान में रीवा मे ंरहन ेवाले मेरे मित्र श्री बृजेश अग्निहोत्री को आज भी यह रचना बहुत पसंद है। छन्दात्मक रचनाओ ंके बाद मैंने अतुकांत रचनाएँ भी लिखीं पर समय के परिवर्तन न ेमुझमे ंभी परिवर्तन लाया और मैं गीत, गज़ल आदि भी लिखने लगा। इसी दौरान मैंन ेआकाशवाणी एवं मंचीय कवि सम्मेलनों मे ंकाव्यपाठ किया। उसी समय से प्रदेश की विभिन्न पत्र पत्रिकाओं मे ंमेरी रचनाओं का प्रकाशन होता रहा है। मैं शुरू से ही अपना नाम ‘‘कुमार सागर‘‘ लिखता आ रहा हूँ। मैंने वर्ष 1995-96 मे ं एक अखिल भारतीय कविसम्मेलन (दमोह) में भी भाग लिया, जिसके आयाजेक, संयाजेक व मंचीय कवि कौन-कौन थे मुझे याद नहीं, परन्तु यह याद है कि मंच का संचालन श्री अशाके चक्रधर जी ने किया था एव ंआदरणीय कुमार विश्वास भी उस मंच पर थे। उस समय भी लोग न ेश्री विश्वास जी को बहुत सुनना था, हम लागे ांे न े काव्यपाठ किया। दसू र े दिन तीन-चार कवियांे के बीच समाचार पत्रों में मेरा चित्र भी प्रकाशित हुआ, जिससे काव्य-रचना के प्रति मेरा रूझान और भी बढ़ा।